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गुफ़्तगू

Writer: Anilesh Kumar
Anilesh Kumar
Jul 30
1 min read

हो सके तो शिकायतों का सबब लिखना, हो सके तो रिवायतों का ग़ज़ब लिखना, इनायतों का करम लिखना, कुछ है दरमियाँ — ये भरम लिखना, लिखना तो ये भी कैसे लफ़्ज़ उलझ गए, लिखना तो ये भी कि ख़याल आँसुओं में बह गए लिखना तो ये भी कि लकीरें अब भी दिखती हैं, ये और बात है कि ख़ुशियाँ दायरों में सिमटी हैं, इसलिए ख़त में थोड़ी जगह रखना, शिकायत ही सही, गुफ़्तगू होगी। ©

 
 
 

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